15 June 2015 से 17 July 2015 तक गुरु की स्तिथि
- अगर हम सूर्य की लग्न से ले तो यह दृष्टि 6 टे भाव , 8 वे भाव, एवं 10 वे भाव में पड़ रही है । 6 और 8 वां भाव ज्योतिष के अनुसार बहुत अच्छा नहीं माना जाता और केतु को भी विध्वंसक या राक्षस गृह माना जाता है ।
- चूँकि गुरु सबसे पवित्र में से एक है और उसकी दृष्टि बहुत अच्छी मानी जाती है इसीलिए यह गुरु अपने दृष्टी सम्बन्धो से 6 वा घर, जो की बीमारी ,दुश्मनी का घर माना जाता है इस घर के विपरीत प्रभावों को रोकने मेँ या फिर यह कहे कि इसकी विध्वंसकता को रोकने में एक अहम भूमिका निभा रहा है ।
- ठीक इसी प्रकार , गुरु: केतु के भी (जो की अभी 10 वे घर में है एवं मीन राशि में है जो की गुरु की स्वयं की राशि है ) विपरीत प्रभावों को रोकने एवं इसकी विध्वंसकता को रोकने में अहम भूमिका निभा रहा है।
- केतु का धर्म से बड़ा गहरा सम्बन्ध है । इसलिए इस समय पर साधारणतः मनुष्य प्रकृति से मिलने वाली उपलब्धियां या वस्तुओं पर एवं जो विपदायें प्रकृति से आने की संभावनाएं होती हैं उनको रोकने में भगवान की आस्था पर बहुत भरोसा करेगा या विश्वास बढ़ेगा ।
- केतु धर्मकारक है और गुरु बहुत पवित्र गृह है, और दोनों मित्र गृह भी है , इसी कारण धार्मिक अनुष्ठानो पर लोगो का विश्वास बढ़ेगा और लोगो का यह मानना रहेगा कि प्रकृतिक चीज़ों की प्राप्ति में spirituality यानि कि आध्यात्मिकता का बहुत बड़ा योगदान है ।
LUCKY BABA
Om Sai....

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